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महाभारत कालीन स्मृतियों को संजोय हुए है रेवाड़ी का गोकलपुर गांव, गीता पाठ्यक्रम में हो सकता है गांव का इतिहास दर्ज- स्वामी ज्ञयानानंद ने भी स्वीकारी महत्वता

-बुधवार को प्राचीन शिवमंदिर पहुंचे गीता मनीषी ने स्वीकारी गोकलपुर से जुडी श्रीकृष्ण और पांडवकुल की स्मृतियां   
-स्वामी ज्ञयानानंद के सानिध्य में कुरुक्षेत्र के गीता ज्ञान संस्थानम में बन रहा है  गीता अनुसंधान केंद्र     
रेवाड़ी,9 दिसंबर, 2020 : भारत एक ऐसा देश जो अनेक सभ्यता,देश-विदेश की संस्कृतियों को चीर काल से खुद में समेटे हुए है और जब बात भारत,अध्यात्म और ज्ञान-विज्ञान की हो तो मुख्य नाम पवित्र ग्रंथ गीता का आना ही है। गीता पर लगातार देश-विदेश में रिसर्च चलती रहती है और आधुनिक युग के वैज्ञानिक भी समय-समय पर इनकी महिमा का गुणगान करते पिछे नही हटते। गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञयानानंद ने रेवाड़ी के गोकलपुर गांव में प्राचीन शिवमंदिर में जूना अखाड़ा के श्रीमहंत स्वामी धीरज गिरी से मुलाकात की और महाभारत, श्रीकृष्ण व पांडवों से जुड़ी गांव  की स्मृतियों को स्वीकारा।
 ज्ञयानानंद ने कहा कि गोकलपुर गांव में महाभारत काल की स्मृतियां विद्यमान हैं। यह गांव पांडवकुल की पूजा-अर्चना का स्थान रहा है। पौराणिक कथाओं में भी इस स्थान की स्मृतियों का वर्णन है।
वे बुधवार को जिले के गांव गोकलपुर स्थित प्राचीन शिवमंदिर में श्रद्धालुओं को आशीर्वचन दे रहे थे। मंदिर में पहुंचने पर जूना अखाड़े के श्रीमहंत स्वामी धीरज गिरि ने गांव की तरफ से शाल ओढाकर एवं गोमाता का स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मान किया। उन्होंने बताया कि गीता के ज्ञान-विज्ञान पर शोध करने एवं वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के लिए कुरुक्षेत्र के गीता ज्ञान संस्थानम में अनुसंधान केंद्र बन रहा है। उनका प्रयास होगा कि गीता को लेकर तैयार होने  वाले पाठ्यक्रम में गोकुलपुर के इतिहास को दर्ज कराएंगे। साथ ही, सरकार से आग्रह करेंगे की इस पवित्र स्थान को रमणीक बनाने के लिए आर्थिक सहयोग करें। उन्होंने कुरुक्षेत्र में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के लिए श्रीमहंत धीरज गिरि और ग्रामीणों को निमंत्रण दिया।   
उन्होंने कहा कि गीता के विज्ञान में मानवता और परमार्थन का ज्ञान छिपा है। गीता पाठ करने से शरीर के बहुत से विकार स्वत: नष्ट हो जाते हैं। गीता को पढऩे और पढक़र दूसरे लोगों को सुनाने वाले व्यक्ति का आत्मबल मजबूत होता है। ये हमारा सौभाग्य है कि भगवान श्रीकृष्ण ने सृष्टी को यह महाज्ञान देने के लिए हरियाणा के  कुरुक्षेत्र की पावन धरती का चयन किया। इसलिए हरियाणा का दायित्व बनता है कि इस ज्ञानगंगा की धारा का विश्व के कोने-कोने में प्रवाह करने प्रयास करना चाहिए। श्रीमद्भागवत में न केवल सामाजिक शिक्षा का ज्ञान है बल्कि तकनीक और चिकित्सा का विज्ञान भी विद्यमान है। गीता संदेश के बाद मंदिर परिसर में भंडार लगाकर प्रसाद  वितरण किया। इस मौके पर कोसली के विधायक लक्ष्मण यादव और रोहतक से पूर्व पार्षद सूरजमल रोज विशेष रूप से मौजूद रहे।

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