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गुरुग्राम: खुले में नमाज को लेकर फिर आमने सामने, अबकी बार सेक्टर-18 के पार्क में हुआ विरोध, जय श्री राम के नारों से गूंज उठा पार्क

गुरुग्राम में खुले में नमाज के विवाद लगातार चल रहा है जो हिन्दुओ के विरोध के बाद शुक्रवार की नमाज पढ़ने के जगहों की संख्या 37 से घटकर 20 रह गई। इस बार दिल्ली बॉर्डर के पास सेक्टर 18 में सिरहौल गांव के पार्क में नमाज पढ़ने पर विरोध शुरू हो गया और लोग आमने-सामने दिखाई दिए।

गुरुग्राम
हरियाणा के गुरुगाम में सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ने को लेकर हुए विरोध के बाद शुक्रवार की नमाज पढ़ने के जगहों की संख्या 37 से घटकर 20 रह गई जो विरोध का सिलसिला अभी भी जारी दिखाई दे रहा है। इस बार दिल्ली बॉर्डर के पास सेक्टर 18 में सिरहौल गांव के पार्क में नमाज पढ़ने पर विरोध शुरू हो गया।

सिरहौल मोड उन 20 सार्वजनिक स्थानों में से एक है, जिसकी पहचान नमाज पढ़ने के लिए समिति ने की है। हालांकि मोड़ पर जगह की कमी की वजह से वे पार्क में नमाज पढ़ने गए, जिसका विरोध कुछ स्थानीय नागरिकों ने किया। लोग तिरंगा लेकर पार्क में आ गए और जय श्रीराम की नारेबाजी शुरू हो गई। 
सिरहौल के निवासी सुधीर यादव ने कहा, 'हम नमाज के विरोधी नहीं हैं। लेकिन यह सार्वजनिक स्थानों पर नहीं पढ़ी जानी चाहिए। मुस्लिमों को मस्जिद में जाकर नमाज पढ़नी चाहिए। पार्क एक सार्वजनिक स्थल है और आसपास के लोग दिनभर यहां आते रहते हैं। यहां धार्मिक कार्य नहीं किया जाना चाहिए।'

विवाद की स्थिति बढ़ती देख पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया। संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के राजीव मित्तल ने कहा कि लोग खुद पब्लिक प्लेस में नमाज पढ़ने के खिलाफ उतर आते हैं। नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद और ईदगाह जैसी जगहें हैं। अगर मुस्लिम धर्म के लोगों को जमीन की कमी पड़ रही है तो उन्हें इसके लिए आवेजन करना चाहिए।

गुरुग्राम मुस्लिम परिषद और नागरिक एकता मंच के सह-संस्थापक अल्ताफ अहमद ने कहा, 'हिंदूवादी संगठनों ने RSS के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच को आगे करके शुक्रवार की नमाज के लिए जगहों की संख्या को घटा दिया है। पूरे सम्मान के साथ नमाज के लिए जब तक सरकार मस्जिद के लिए जमीन नहीं दे देती, तब तक ऐसी अड़चनें आती रहेंगी।'

वहीं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के अध्यक्ष और हरियाणा वक्फ बोर्ड के चेयरमैन खुर्शीद राजाका ने कहा कि प्राधिकरण के साथ सलाह के बाद नमाज के लिए जगहें चुन ली गई हैं। हम चाहते हैं कि इस मामले पर राजनीति ना हो और शांति बनी रहे। अगर मस्जिद के लिए जमीन की जरूरत है तो लोगों को वक्फ बोर्ड के पास जाना चाहिए।

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